शुक्रवार, 25 जून 2010

ऐसी साक्षर पड़ी - लिखी स्त्रियाँ जिन्हें इच्छा शक्ति कि कमी मुक्त नहीं होने देती

ऐसी स्त्रियाँ जो मुक्ति से अवगत तो हैं - मुक्त होना भी चाहती हैं लेकिन इच्छा शक्ति कि कमी के कारण वे परिवार कि इज्ज़त, तथाकथित स्त्रिवत मर्यादा, संतान कि ममता के चक्रव्यूह तथा समाज और धर्म के भय के दायरे से बहार नहीं निकल पातीं हैं. वे घरेलू, हिंसा, प्रताड़ना और अपमान को दम साधकर दुखी मन से सहती रहती हैं पर उसके विरुध्द विद्रोह नहीं कर पातीं. सामाजिक बदनामी या निंदा, धार्मिक वर्जनाओं और अंधविश्वासों का दर तो उनमे व्याप्त होता ही है, लेकिन परिवार और पति पर पूरी तरह आर्त्जिक निर्भरता भी उनकी इस दुविधा और दुर्गति का एक कारण बड़ा कारण है. माता - पिता भी उन्हें पतियों के भरोसे ही छोड़ देते हैं.

1 टिप्पणी:

sidheshwer ने कहा…

अच्छी बात !
लेकिन वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ दूर कर लेवें तो और अच्छी बात हो जाएगी।


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